Wednesday, February 23, 2011

संयुक्त संसदीय समिति की मंशा

शायद प्रधानमंत्री जी ने यह बात समझ ली है कि बगैर संयुक्‍त संसदीय समिति संसद का बजट सत्र चलने वाला नहीं है| मगर उनके या फिर यूँ कहें की कॉंग्रेस के इस निर्णय के पीछे की प्रेरणा शायद कुछ और रही होगी अन्यथा जिस चीज़ से परहेज़ थी उस पर बात बन कैसे गयी? जिन परिस्थतियों में समिति के गठन की घोषणा की गयी उसपर गौर करना उचित होगा और यह जानना चाहिए कि कौन से कारक इस देश में सरकारों के फ़ैसले को प्रभावित करते हैं|
तमिलनाडु और बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और दोनो प्रन्तो की पार्टियों के साथ कॉंग्रेस की केन्द्र में गठबंधन है| इन दोनो प्रन्तो की पार्टियों के साथ विधानसभा चुनावों में कॉंग्रेस साथ खड़ी है| इन दोनो प्रांतों में कॉंग्रेस काफ़ी कमज़ोर स्थिति में रही है| बंगाल और तमिलनाडु में कॉंग्रेस की आख़िरी सरकार कब थी यह अब तथ्य लोगो के स्मृति पटल से मिट चुकी है| मुद्दा सीट बटवारे का भी है और विधानसभा चुनावों में मज़बूत होकर उभरने का भी है| जीत सुनिस्चित करने के लिए लोगों तक कुछ ना कुछ तो पहुँचाना होगा और इसके लिए बॅजट ही सबसे उपयुक माध्यम है| ममता के हाथ में रेल है| ममता की गाड़ी पटरी पे लगती है और वाम की पटरी से उतरती| ऐसे में बस एक हल्का सा धकका ही उनके राजनैतिक प्रतिद्वंदियों को धराशायी कर सकता है| इसी धकके को हम बॅजट में देखेंगे|
इस बॅजट में सबसे बड़ी बाधा भारतीय जनता पार्टी ही थी जो की जे.पी.सी. को लेकर संसद ना चलने देने पर आमादा थी| अब जबकि सत्र शुरू हो चुका है देखना ये है कि पक्षपात के आरोपो से घिरी ममता बंगाल को कितना तोहफा देती हैं| उन्हें जिस दिन की प्रतीक्षा थी और जिस दिन के लिए उन्होने बंगाल में अपना बतौर रेलमंत्री स्थानांतरण किया था उस दिन के लिए कितने प्रदेशों की उपेक्षा की जाती है| २जी से जुड़ी जाँच लंबी चलेगी और इससे ममता को कोई ख़तरा भी नहीं हा| अतः ये संभव है की कहीं ना कहीं जे.पी.सी. का दबाव मोर्चे के अंदर से भी आया होगा| अब भारतीय जनता पार्टी चाहे जितना भी दम भर ले यह पूर्णरूप से उसकी सफलता नहीं है| और ये सरकार की निष्पक्ष जाँच में रूचि से ज़्यादा चुनावों में रूचि ज़्यादा है| सरकार की ईमानदारी तो सरकार ही जानती है लेकिन इन बातों से जनता ज़रूर दिग्भ्रमित हो जाती है कि शायद इस बार कुछ हो| इस कदम से जनता में जो उमीद जागी है उस पर खरा उतरना सरकार का काम है|

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